मुख्यमंत्री साय बने किसान! गृहग्राम बगिया के खेत में थामा हल, बैलों की जोड़ी संग की बियासी; ताजा हुईं बचपन की यादें
गृहग्राम बगिया के खेत में बैलों की जोड़ी के साथ हल चलाते मुख्यमंत्री साय की तस्वीर ने एक बार फिर उनके ‘माटी से जुड़े’ अंदाज को सामने ला दिया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के अन्नदाता किसानों के परिश्रम को नमन करते हुए उनके जीवन में खुशहाली और खेतों में भरपूर फसल की कामना की।

जशपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपनी माटी और खेती-किसानी से गहरा जुड़ाव एक बार फिर देखने को मिला। सोमवार सुबह मुख्यमंत्री अपने गृहग्राम बगिया के खेत में पहुंचे और बैलों की जोड़ी के साथ पारंपरिक तरीके से हल चलाकर बियासी की। मुख्यमंत्री ने खेत में उतरकर हल की मूठ थामी तो कुछ देर के लिए उनका मुख्यमंत्री वाला रूप पीछे छूट गया और वे सहज ही एक किसान की भूमिका में नजर आए।
खेत में उतरे CM साय, बैलों के साथ चलाया हल
हरे-भरे खेत में मिट्टी की सौंधी खुशबू के बीच मुख्यमंत्री साय ने बैलों की जोड़ी के साथ खेत की जुताई की। हल की मूठ थामते ही उन्होंने खेती-किसानी से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को भी साझा किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने गांव, अपनी माटी और अपने खेत से जुड़ने का सुख ही अलग है। हल की मूठ हाथ में आते ही खेती से जुड़ी पुरानी स्मृतियां जीवंत हो उठती हैं। खेतों के बीच बिताया समय मन को सुकून देने के साथ नई ऊर्जा भी देता है।
बोले- खेती मेरे लिए सिर्फ आजीविका नहीं, जीवन का संस्कार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और बचपन से ही खेती-किसानी को करीब से देखा और जिया है। उनके लिए खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार है।
उन्होंने कहा कि गांव और खेतों ने उन्हें श्रम का सम्मान करना, प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना सिखाया है।
किसानों के श्रम को किया नमन
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की माटी, मेहनतकश किसानों और समृद्ध कृषि परंपराओं से जुड़ी है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी खेती की अहम भूमिका है।
उन्होंने कहा कि हमारे किसान पीढ़ियों से अपने पसीने से धरती को सींचकर प्रदेश की समृद्धि की नींव मजबूत करते आए हैं। छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहार और ग्रामीण जीवन भी कृषि परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं।
आधुनिकता के बीच परंपराओं से जुड़े रहना जरूरी
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक दौर में भी अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहना बेहद जरूरी है। खेती हमें मेहनत, धैर्य और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि किसान खेत में केवल फसल नहीं उगाता, बल्कि अपने श्रम से पूरे समाज के जीवन और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देता है।
बगिया के खेत में दिखा CM साय का ‘किसान वाला अंदाज’
मुख्यमंत्री का जीवन ग्रामीण परिवेश और खेती-किसानी से गहराई से जुड़ा रहा है। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच जब भी उन्हें मौका मिलता है, वे अपने गांव और खेतों से जुड़ना पसंद करते हैं।
